पुनपुन घाट की आखिरी ट्रेन – चंदन
पुनपुन घाट की आखिरी ट्रेन: रूह कंपा देने वाला अंतपुनपुन स्टेशन की रातें वैसे ही भारी होती हैं, लेकिन उस […]
पुनपुन घाट की आखिरी ट्रेन: रूह कंपा देने वाला अंतपुनपुन स्टेशन की रातें वैसे ही भारी होती हैं, लेकिन उस […]
बेहरावन की पुनपुन नदी का रहस्यचंदन की ज़ुबानी – सच्ची घटना से प्रेरित हॉरर कहानीमेरा नाम चंदन है। मैं बिहार
यह कहानी ओडिशा के एक छोटे से गाँव देउलबाद की है। यह गाँव शहर से थोड़ा दूर था। गाँव में
कविता: “रात की चीख़” लेखक: अंकित शर्मा रात ढली, गांव की गलियाँ सुनसान, हवा में घुली थी डर की बेज़बान
तेरी शैडो भी मुझ पर न पड़े रात ने जब साँसें रोक लीं,दीवारों ने फुसफुसाना शुरू किया,तू बोली थी —
मकान नम्बर 13 प्रयागराज की एक पुरानी बस्ती में मकान नम्बर 13 वर्षों से खाली पड़ा था। लोगों का मानना
रात का समय था। पहाड़ी पर बने प्राचीन मंदिर में शांति पसरी हुई थी। कहा जाता था कि यहाँ आधी
रायपुर के छोटे से कस्बे में रहने वाली लेखिका नंदिनी रात-रातभर अपनी कहानियाँ लिखती थी। उसे विश्वास था कि डरावनी
रात के 12 बजे का समय था। नेहा अकेली अपने पुराने मकान में पढ़ाई कर रही थी। अचानक बिजली चली
गंगा की पुकार वाराणसी के घाट पर हर शाम की तरह आरती हो रही थी। ढेरों दीपक गंगा की लहरों