काली परछाई -अर्पिता शाहरे
काली परछाई एक गांव में नीलकंठ नामक मुखिया था। उसकी एक बेटी थी। जिसका नाम गोरी था। गोरी बहुत ही
काली परछाई एक गांव में नीलकंठ नामक मुखिया था। उसकी एक बेटी थी। जिसका नाम गोरी था। गोरी बहुत ही
चाटी गाँव का श्राप मेरा नाम रणदीप जरल है, और मैं जो कहानी सुनाने जा रहा हूँ, उसे सुनकर आपके
मेरा नाम रणदीप है, और आज मैं आपको एक बहुत ही दिल दहला देने वाली कहानी सुनाने जा रहा हूं।जब
अर्जुन और काव्या की शादी बड़े धूमधाम से संपन्न हुई। दोनों परिवारों में खुशी का माहौल था। अगले दिन काव्या
पुनपुन घाट की आखिरी ट्रेन: रूह कंपा देने वाला अंतपुनपुन स्टेशन की रातें वैसे ही भारी होती हैं, लेकिन उस
बेहरावन की पुनपुन नदी का रहस्यचंदन की ज़ुबानी – सच्ची घटना से प्रेरित हॉरर कहानीमेरा नाम चंदन है। मैं बिहार
यह कहानी ओडिशा के एक छोटे से गाँव देउलबाद की है। यह गाँव शहर से थोड़ा दूर था। गाँव में
कविता: “रात की चीख़” लेखक: अंकित शर्मा रात ढली, गांव की गलियाँ सुनसान, हवा में घुली थी डर की बेज़बान
तेरी शैडो भी मुझ पर न पड़े रात ने जब साँसें रोक लीं,दीवारों ने फुसफुसाना शुरू किया,तू बोली थी —
मकान नम्बर 13 प्रयागराज की एक पुरानी बस्ती में मकान नम्बर 13 वर्षों से खाली पड़ा था। लोगों का मानना