मकान नंबर 13 — रेखा गुप्ता
मकान नम्बर 13 प्रयागराज की एक पुरानी बस्ती में मकान नम्बर 13 वर्षों से खाली पड़ा था। लोगों का मानना […]
मकान नम्बर 13 प्रयागराज की एक पुरानी बस्ती में मकान नम्बर 13 वर्षों से खाली पड़ा था। लोगों का मानना […]
रात का समय था। पहाड़ी पर बने प्राचीन मंदिर में शांति पसरी हुई थी। कहा जाता था कि यहाँ आधी
रायपुर के छोटे से कस्बे में रहने वाली लेखिका नंदिनी रात-रातभर अपनी कहानियाँ लिखती थी। उसे विश्वास था कि डरावनी
रात के 12 बजे का समय था। नेहा अकेली अपने पुराने मकान में पढ़ाई कर रही थी। अचानक बिजली चली
गंगा की पुकार वाराणसी के घाट पर हर शाम की तरह आरती हो रही थी। ढेरों दीपक गंगा की लहरों
लेखक का नाम: अर्जुन मेहराअर्जुन को बचपन से भूत-प्रेत और रहस्यमयी जगहों पर लिखना पसंद है। खाली समय में वे
लेखिका :लक्ष्मी जायसवाल नेहा को एक रहस्यमयी ईमेल मिला:“अगर तुम्हें सच्चा डर देखना है, तो ‘काली खाई’ जाओ, लेकिन ध्यान
छाया का कमरा मुंबई से दूर महाराष्ट्र के एक पहाड़ी गाँव में एक वीरान बंगला था—’राजवाड़ी हवेली’। लोग कहते थे,
आरव, दिल्ली का एक महत्वाकांक्षी लेखक था, जो अपनी अगली किताब के लिए एकांत और सच्ची घटनाओं से प्रेरणा चाहता
छाया की पुकार.. उत्तराखंड के एक छोटे से गाँव “गुंजनपुर” में एक पुराना हवेली खंडहर पड़ी थी। गाँव वाले कहते