बेहरावन की पुनपुन नदी का रहस्यचंदन की ज़ुबानी – सच्ची घटना से प्रेरित हॉरर कहानीमेरा नाम चंदन है। मैं बिहार के बेहरावन गाँव का रहने वाला हूँ।
यह कहानी हमारे परिवार से जुड़ी एक घटना पर आधारित है, जिसे गाँव के लोग आज भी याद करते हैं।हमारे एक कज़न भाई थे। गाँव में चर्चा थी कि उन्हें अपनी भाभी से लगाव हो गया था। समय के साथ उनकी ज़िंदगी बदल गई। वे अकेले रहने लगे और बहुत उदास रहने लगे।एक दिन पूरे गाँव को हिला देने वाली खबर मिली। उन्होंने फाँसी लगाकर अपनी जान दे दी। परिवार पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा। इसके बाद उनका शरीर पुनपुन नदी में बहा दिया गया। सबको लगा कि कहानी यहीं समाप्त हो गई।लेकिन पाँच दिन बाद, गर्मी के कारण पुनपुन नदी का पानी कम होने लगा। सुबह गाँव के कुछ लोगों ने कीचड़ में फँसी एक लाश देखी। पास जाकर पता चला कि वह हमारे कज़न भाई की लाश थी। यह देखकर लोग डर गए। परिवार के लोगों ने हिम्मत करके शरीर को फिर से गहरे पानी में धकेल दिया।उस रात के बाद अजीब घटनाएँ होने लगीं। कुछ लोगों ने नदी की तरफ़ से रोने की आवाज़ सुनी। कुछ ने कहा कि उन्होंने अंधेरे में एक साया देखा जिसकी गर्दन टेढ़ी थी।
अमावस्या की एक रात कुछ गाँव वालों ने सफेद धुंध जैसी आकृति को पुनपुन नदी के किनारे देखा। सुबह कीचड़ में पैरों के निशान मिले जो नदी से गाँव की तरफ़ जा रहे थे। वापस नदी की ओर कोई निशान नहीं था।आज भी बेहरावन के कुछ बुज़ुर्ग कहते हैं कि रात देर तक पुनपुन नदी के किनारे नहीं रुकना चाहिए। उनका कहना है कि कभी-कभी हवा के साथ एक धीमी सी फुसफुसाहट सुनाई देती है—“मुझे फिर से पानी में मत डालना…”यह कहानी हॉरर शैली में लिखी गई है। इसमें वर्णित अलौकिक घटनाएँ लोक-कथाओं और गाँव में सुनाई जाने वाली बातों पर आधारित हैं।
