पानी की टंकी में बसी आत्मा
—जी.पी डोरिया दिन दहाड़े भी लोग, उस गली से गुजरने में डरते थे। बच्चे तो कभी उस और से जाते […]
—जी.पी डोरिया दिन दहाड़े भी लोग, उस गली से गुजरने में डरते थे। बच्चे तो कभी उस और से जाते […]
✒️—जी.पी डोरिया ✒️—लक्ष्मी जायसवाल रात के ठीक 12 बजे, रागिनी अपने कमरे में अकेली पढ़ाई कर रही थी। खिड़की से
—✒️जी.पी डोरिया —✒️लक्ष्मी जायसवाल ( गहरी सांस लेते हुए ) जैमिन – भाभी आप…!आप यहां क्या कर रही हो इतनी
“खंडहर की छाया: भूतनी की रात” — ✒️जी.पी डोरिया —✒️लक्ष्मी जायसवाल लोग कहते है कि, गांव की बाहर पुरानी सड़क