“काली हवेली की सुहागरात” — एक डरावनी कहानी”— संजय पटीदार
उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव में एक पुरानी हवेली थी, जिसे लोग “काली हवेली” कहते थे। कहते हैं […]
उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव में एक पुरानी हवेली थी, जिसे लोग “काली हवेली” कहते थे। कहते हैं […]
“दस्तक 2:13”मुंबई की एक पुरानी इमारत में सस्ते किराए पर मिला फ्लैट आरव के लिए नई शुरुआत जैसा था, लेकिन
https://drive.google.com/file/d/10lPsE604xfGKiR8cmUdOK36oqSZFIQrf/view?usp=drivesdk
तीन दिन से लगातार बारिश हो रही थी।गाड़ी के टायर गीली सड़क पर फिसलते हुए आगे बढ़ रहे थे और
https://drive.google.com/file/d/10lPsE604xfGKiR8cmUdOK36oqSZFIQrf/view?usp=drivesdk
तेरी शैडो भी मुझ पर न पड़े रात ने जब साँसें रोक लीं,दीवारों ने फुसफुसाना शुरू किया,तू बोली थी —
मैं न जीता हूँ, न मरता,फिर भी रात को सबको डराता।न शरीर है, न आवाज़,पर सन्नाटे में आता हूँ पास।आइने