पहेली — जवाब देने की हिम्मत है?
मैं न जीता हूँ, न मरता,फिर भी रात को सबको डराता।न शरीर है, न आवाज़,पर सन्नाटे में आता हूँ पास।आइने […]
मैं न जीता हूँ, न मरता,फिर भी रात को सबको डराता।न शरीर है, न आवाज़,पर सन्नाटे में आता हूँ पास।आइने […]
“कुछ परछाइयाँ पीछा नहीं छोड़तीं… भले ही वो आपकी न हों।” गांव के एक कोने में एक पुरानी हवेली खड़ी