“काली हवेली की सुहागरात” — एक डरावनी कहानी”— संजय पटीदार
उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव में एक पुरानी हवेली थी, जिसे लोग “काली हवेली” कहते थे। कहते हैं
दस्तक 2:13- दीपक झा
“दस्तक 2:13”मुंबई की एक पुरानी इमारत में सस्ते किराए पर मिला फ्लैट आरव के लिए नई शुरुआत जैसा था, लेकिन
खिड़की के पार – नेहा वर्मा
रात के 3:07 बजे पूरे मोहल्ले में गहरा सन्नाटा पसरा हुआ था, तभी मीरा अचानक नींद से जाग गई। उसका
KUMUDINI – BINI ROY
KUMUDINI Swara suddenly woke up, her throat parched. For a while, she had been having all sorts of strange dreams;
आखिरी प्लेटफार्म – भावेश पटेल
कहा जाता है कि हर रेलवे स्टेशन पर एक ऐसा प्लेटफॉर्म होता है,जो नक़्शे में नहीं दिखता…जो सिर्फ़ उसी इंसान
आखिरी प्लेटफार्म – भावेश पटेल
https://drive.google.com/file/d/10lPsE604xfGKiR8cmUdOK36oqSZFIQrf/view?usp=drivesdk
नदी किनारे आख़िरी बारिश – भावेश पटेल
तीन दिन से लगातार बारिश हो रही थी।गाड़ी के टायर गीली सड़क पर फिसलते हुए आगे बढ़ रहे थे और
तीसरी मंजिल का पहरेदार – भावेश पटेल
तीसरी मंजिल का पहरेदार (The Guardian of the 3rd Floor) रोहित को पैसों की सख्त जरूरत थी, इसलिए उसने शहर
