रात के 3:07 बजे पूरे मोहल्ले में गहरा सन्नाटा पसरा हुआ था, तभी मीरा अचानक नींद से जाग गई। उसका गला सूख रहा था और दिल बहुत तेज़ धड़क रहा था, लेकिन उसे जगाने वाली प्यास नहीं बल्कि खिड़की पर आती हुई हल्की-हल्की खटखट की आवाज़ थी, जैसे कोई उँगलियों से धीरे-धीरे शीशे पर दस्तक दे रहा हो। मीरा ने डरते हुए खिड़की की तरफ देखा; परदे बिना हवा के भी हिल रहे थे। उसने हिम्मत करके पूछा—“कोई है?” लेकिन कोई जवाब नहीं आया और आवाज़ भी अचानक बंद हो गई। उसने राहत की साँस ली और वापस लेटने लगी, तभी अचानक फिर से तेज़ खटखट की आवाज़ गूँज उठी। अब उसका शरीर काँपने लगा था। वह धीरे-धीरे उठी और खिड़की के पास जाकर काँपते हाथों से परदा हटाया, लेकिन जो उसने देखा, उससे उसकी चीख भी बाहर नहीं निकल पाई—तीसरी मंज़िल की ऊँचाई पर खिड़की के बाहर एक औरत खड़ी थी, जिसके बाल पूरे चेहरे पर फैले हुए थे और जिसकी उँगलियाँ अस्वाभाविक तरीके से उल्टी दिशा में मुड़ी हुई थीं। मीरा डर के मारे पीछे हट गई, लेकिन तभी वह औरत धीरे-धीरे अपना सिर उठाने लगी और उसका चेहरा दिखाई दिया—उसकी आँखें नहीं थीं, सिर्फ काले खाली गड्ढे थे। मीरा घबरा कर जमीन पर गिर पड़ी और खुद को समझाने लगी कि यह सब सपना है, लेकिन तभी खिड़की अपने आप अंदर की ओर खुल गई, ठंडी हवा का तेज़ झोंका आया और कमरे की लाइट बंद हो गई। अब कमरे में सिर्फ अंधेरा था और यह एहसास कि कोई अंदर आ चुका है। मीरा ने काँपते हुए मोबाइल की टॉर्च ऑन की, रोशनी में कमरा खाली दिखा, लेकिन अचानक उसे अपने पीछे किसी की ठंडी और भारी साँस महसूस हुई। उसने धीरे-धीरे पीछे मुड़कर देखा तो वही औरत बिल्कुल उसके पीछे खड़ी थी, इतनी करीब कि उसके बाल मीरा के चेहरे को छू रहे थे। तभी वह औरत धीमी, डरावनी आवाज़ में फुसफुसाई—“तुमने मुझे अंदर आने दिया…”अगली सुबह जब पड़ोसियों ने मीरा के घर का दरवाज़ा तोड़ा, तो कमरा अंदर से बंद था और मीरा बिस्तर पर बैठी मिली, उसकी आँखें खुली थीं लेकिन वह ज़िंदा नहीं थी। उसके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान थी और उसकी उँगलियाँ भी उसी औरत की तरह उल्टी मुड़ी हुई थीं। उस दिन के बाद से उस घर की खिड़की कभी बंद नहीं हुई और मोहल्ले के लोग कहते हैं कि हर रात ठीक 3:07 बजे वहाँ खटखटाने की आवाज़ आज भी सुनाई देती है। लोग ये भी कहते हैं कि अगर किसी ने गलती से भी उस खिड़की का परदा हटा दिया, तो शायद वह भी किसी को अंदर आने का मौका दे देगा… और फिर कभी वापस नहीं लौटेगा।

