पहेली — जवाब देने की हिम्मत है?
मैं न जीता हूँ, न मरता,फिर भी रात को सबको डराता।न शरीर है, न आवाज़,पर सन्नाटे में आता हूँ पास।आइने […]
मैं न जीता हूँ, न मरता,फिर भी रात को सबको डराता।न शरीर है, न आवाज़,पर सन्नाटे में आता हूँ पास।आइने […]
—लक्ष्मी जायसवाल कहते हैं प्रेम स्वर्ग बनाता है, और विश्वासघात नर्क का द्वार खोलता है। पर अगर प्रेम ही नर्क
मुंबई की शामें जब धुंध में लिपटने लगती हैं और समंदर की लहरें किसी भूली-बिसरी कहानी की तरह किनारे से
मुंबई की चहल-पहल और भीड़भाड़ से दूर, समुद्र की लहरों के किनारे एक वीरान किला खड़ा है — शिवड़ी फ़ोर्ट।
✒️—जी.पी डोरिया ✒️—लक्ष्मी जायसवाल रात के ठीक 12 बजे, रागिनी अपने कमरे में अकेली पढ़ाई कर रही थी। खिड़की से
—✒️जी.पी डोरिया —✒️लक्ष्मी जायसवाल ( गहरी सांस लेते हुए ) जैमिन – भाभी आप…!आप यहां क्या कर रही हो इतनी
“खंडहर की छाया: भूतनी की रात” — ✒️जी.पी डोरिया —✒️लक्ष्मी जायसवाल लोग कहते है कि, गांव की बाहर पुरानी सड़क
नाम है मेरा माया – सिद्धिकी रुखसाना नाम है मेरा माया,मैं हूं दुसरे दुनियां की छाया ,जी हां नाम हैं
In a small village called Dharmapur, hidden between hills and dense forests, there stood an ancient banyan tree. The tree
In the dark, it waits for me,Hiding where I cannot see.A shadow long, a face unknown,A voice that chills me