Horror Story

कफन वाला

—लक्ष्मी जायसवाल गाँव का वो टूटा-फूटा घर अब बस एक डरावनी याद बन चुका था। दीवारों की मिट्टी झड़ चुकी

Horror Poem

काली रात

✒️—Siddiqui Rukhsana सुनसान सी गलियों में, मैं खुद को ढूंढ रही हूं,क्या खो गई हूँ  खुद में ,सवाल खुद से

Horror Poem

छाया

—लक्ष्मी जायसवाल आधी रात को बजती घड़ी,हर साया लगता अनदेखी छड़ी। बत्ती जले तो बुझ जाए,पीछे कोई सांसें गिन जाए।

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