पाथुरिया घाट की परछाई —लक्ष्मी जायसवाल
स्थान: पाथुरिया घाट, नदिया ज़िला, पश्चिम बंगालसाल: 2003 कहानी शुरू होती है… 2003 की बात है। नदिया ज़िले के एक […]
स्थान: पाथुरिया घाट, नदिया ज़िला, पश्चिम बंगालसाल: 2003 कहानी शुरू होती है… 2003 की बात है। नदिया ज़िले के एक […]
गाँव सोंधीपुर की सीमा पर एक पुराना, टूटा-फूटा हवेलीनुमा घर था, जिसे सब “झाड़ियों वाला बंगला” कहते थे। कहते हैं,
—✒️ mahamatsya उत्तराखंड के एक दूर-दराज गाँव में एक पुरानी, उजड़ी हुई हवेली थी, काली हवेली। कहते हैं वहाँ रात
शाम के धुंधलके में वह पुराना तालाब अजीब-सा चमक रहा था। गाँव के लोग कहते थे कि वहाँ कुछ है,
—✒️लक्ष्मी जायसवाल मुंबई शहर से लगभग 30 किलोमीटर दूर एक गाँव है देवखोरी। यह गाँव तो शांत और सुंदर था,
— ✒️लक्ष्मी जायसवाल शहर के सबसे पुराने अस्पताल के पीछे एक छोटा-सा मुर्दाघर था। यह इमारत इतनी पुरानी थी कि
_लक्ष्मी जायसवाल पीपल की छाँव तले मत जाना,बूढ़े लोग बार-बार समझाते थे।वो कहते—दिन में पेड़, रात में क़ैदखाना,जहाँ साया नहीं,
_लक्ष्मी जायसवाल गाँव के एक सिरे पर एक पुराना हवेलीनुमा घर था—सफ़ेद दीवारों पर समय की काई जमी हुई थी,