ट्रेन की आवाज़ — लक्ष्मी जायसवाल
हर रात 12:30 बजे, उस सुनसान स्टेशन पर एक पुरानी ट्रेन की सीटी सुनाई देती थी। पर हैरानी की बात […]
हर रात 12:30 बजे, उस सुनसान स्टेशन पर एक पुरानी ट्रेन की सीटी सुनाई देती थी। पर हैरानी की बात […]
यह कहानी रमेश यादव नाम के व्यक्ति की है, जो रेलवे में गार्ड की नौकरी करते थे। उन्हें अक्सर रात
मुंबई के उपनगर में एक पुरानी इमारत है – ‘शिव सदन’। एक संकरी, अंधेरी गली में छिपी हुई यह बिल्डिंग
राजस्थान की भूमि जहां एक ओर वीरों के साहस की गाथाएँ बिखरी हैं, वहीं दूसरी ओर वहां की रेत में
यह बारिश नहीं मेरी जान है,जिस पे लाखों लोग कुर्बान है,बूंदे जब गिरती है धरती पर यू लगता हैं जैसे
आधी रात की ठंडी सांसें,गूँज रही हैं खाली प्यासें।दीवारों से आती आहट,जैसे कोई कहे कोई बात अनजानी सी राहत। दरवाज़ा
मीनाक्षी को पुराने सामान इकट्ठा करने का शौक था। एक दिन उसे एक एंटीक दुकान से बहुत सुंदर आइना मिला।
डाउ हिल एक छोटा-सा पहाड़ी इलाका है जो दार्जिलिंग के पास स्थित है। यह जगह सिर्फ अपने प्राकृतिक सौंदर्य के
साल 2003 में दिल्ली के पश्चिम विहार इलाके में एक परिवार रहता था – मिश्रा परिवार। परिवार में माता-पिता और
नरक की खिड़की —लक्ष्मी जायसवाल सन् 2014, मुंबई के मलाड इलाके में एक पुरानी इमारत थी — राजवाड़ी अपार्टमेंट। इस