आखिरी प्लेटफार्म – भावेश पटेल
https://drive.google.com/file/d/10lPsE604xfGKiR8cmUdOK36oqSZFIQrf/view?usp=drivesdk
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यह कहानी ओडिशा के एक छोटे से गाँव देउलबाद की है। यह गाँव शहर से थोड़ा दूर था। गाँव में
कविता: “रात की चीख़” लेखक: अंकित शर्मा रात ढली, गांव की गलियाँ सुनसान, हवा में घुली थी डर की बेज़बान
तेरी शैडो भी मुझ पर न पड़े रात ने जब साँसें रोक लीं,दीवारों ने फुसफुसाना शुरू किया,तू बोली थी —
सन्नाटा 111 मुंबई के पुराने औद्योगिक इलाके में एक पुराना अपार्टमेंट ब्लॉक था, जिसे लोग “111” कहते थे। इसका नंबर
“रात का दरवाज़ा” शालिनी एक सरकारी स्कूल में टीचर थी।नई जगह पर जॉइन करने के बाद उसे सरकारी क्वार्टर मिला
मकान नम्बर 13 प्रयागराज की एक पुरानी बस्ती में मकान नम्बर 13 वर्षों से खाली पड़ा था। लोगों का मानना
रात का समय था। पहाड़ी पर बने प्राचीन मंदिर में शांति पसरी हुई थी। कहा जाता था कि यहाँ आधी
रायपुर के छोटे से कस्बे में रहने वाली लेखिका नंदिनी रात-रातभर अपनी कहानियाँ लिखती थी। उसे विश्वास था कि डरावनी