वापसी — लक्ष्मी जायसवाल
आरव, दिल्ली का एक महत्वाकांक्षी लेखक था, जो अपनी अगली किताब के लिए एकांत और सच्ची घटनाओं से प्रेरणा चाहता […]
आरव, दिल्ली का एक महत्वाकांक्षी लेखक था, जो अपनी अगली किताब के लिए एकांत और सच्ची घटनाओं से प्रेरणा चाहता […]
छाया की पुकार.. उत्तराखंड के एक छोटे से गाँव “गुंजनपुर” में एक पुराना हवेली खंडहर पड़ी थी। गाँव वाले कहते
साल 2019। रात के 11:45 पर मुंबई से उड़ान भरने वाली Flight 309 में 178 यात्री और 7 क्रू मेंबर
सुनसान रातें थीं, चाँद था काफ़ी दूर,और हवाओं में कोई पुरानी सिसकी सी घुली थी।मैं लौटी थी उस हवेली में,जहाँ
यह कहानी उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव की है, जहाँ एक पुरानी हवेली वर्षों से वीरान पड़ी थी।
साल 1994 में दिल्ली के मेहरौली इलाके में एक पुराने और उजड़े से बंगले के पास कुछ मजदूर काम कर
हर रात 12:30 बजे, उस सुनसान स्टेशन पर एक पुरानी ट्रेन की सीटी सुनाई देती थी। पर हैरानी की बात
यह कहानी रमेश यादव नाम के व्यक्ति की है, जो रेलवे में गार्ड की नौकरी करते थे। उन्हें अक्सर रात
मुंबई के उपनगर में एक पुरानी इमारत है – ‘शिव सदन’। एक संकरी, अंधेरी गली में छिपी हुई यह बिल्डिंग
राजस्थान की भूमि जहां एक ओर वीरों के साहस की गाथाएँ बिखरी हैं, वहीं दूसरी ओर वहां की रेत में