किच्चीन – केशव

इंट्रो :

बिहार के लखीसराय में बसे एक छोटे से गाँव डुमरी में आज भी कुछ ऐसी शक्तियाँ मौजूद है जिनसे सामना न ही हो तो बेहतर है।स्टोरी स्टार्ट :अप्रैल की शुरुआत के साथ ही कॉलेज का नया सत्र शुरू हो चुका था। कैंपस में चारों ओर हंसी-मजाक, नए चेहरों और पुरानी दोस्तियों की आवाजे गूंज रही थीं। इसी शोर से थोड़ा दूर, राहुल अकेला बैठा अपनी पुरानी घड़ी की ओर देख रहा था। चेहरे पर न उत्साह था, न किसी से मिलने की जल्दी, बस एक अजीब सी खामोशी थी।तभी उसके सामने से गुजर रही एक लड़की के हाथ से कुछ किताबें फिसल कर जमीन पर गिर पड़ी, राहुल तुरंत अपनी जगह से उठा और बिना कुछ कहे किताबें उठाने में उसकी मदद करने लगा। राहुल ने आखरी किताब उठाई और लड़की की ओर बढ़ाई।राहुल – ये लीजिए आपकी किताब।लडकी ने बोला थँक यु और मुस्कुराके राहुल की ओर हाथ बढ़ाते हुए कहा,लड़की – मै अनामिका, और आप??दोनों के बीच कुछ पल तक खामोशी का चादर फैला रहा। लेकिन फिर राहुल ने हकलाते हुए जवाब दिया“र… रा.. राहुल”“माफ कीजियेगा मैं सुंदर लड़कियों से अच्छे से बात नहीं कर पाता।”अनामिका के चेहरा पर तुंरत एक बड़ी सी मुस्कान छा गई। तभी कॉलेज के घंटी की झन्नाटेदार आवाज दोनों के कानों में पड़ी।“क्लास चालू होने वाली है जल्दी चलो”|

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सीन 2 :

अगले कुछ दिनों में राहुल और अनामिका की मुलाकातें बढ़ने लगीं। अनामिका का मिलते ही गले लग जाना, दिन की सारी बीती हुई बातें सुनाना और राहुल के साथ घूमना-फिरना राहुल को बड़ा भा रहा था। एक शांत रहने वाले लड़के की जिंदगी में आने वाली ये सबसे बड़ी खुशी थी। जो राहुल कॉलेज की भीड़ में भी अकेला बैठा रहता था, अब वो हर सुबह किसी का इंतजार करता। अब कॉलेज आने की उसे पहले जैसी मजबूरी महसूस नहीं होती थी, वह बस इस उम्मीद में जल्दी आने लगा था कि शायद अनामिका उससे पहले ही वहाँ उसका इंतजार कर रही हो। कभी दोनो कैंटीन में घंटों बैठे रहते, तो कभी बिना किसी खास वजह के कॉलेज के गलियारों में घूमते रहते। अनामिका की छोटी छोटी बातें भी राहुल के चेहरे पर मुस्कान ले आती थी।धीरे-धीरे उसे अनामिका की आदत सी हो गई। अब अगर एक दिन भी अनामिका उससे बात नहीं करती, तो राहुल का पूरा दिन अधूरा सा लगता। उसे खुद भी पता नहीं चला कि कब अनामिका उसके लिए सिर्फ एक दोस्त से बढ़कर बन गई। वह उससे प्यार करने लगा था। और शायद अनामिका भी उसके लिए कुछ ऐसा ही महसूस करने लगी थी।

सीन 3 :

शाम का वक्त था,सूरज धीरे-धीरे ढल रहा था और आसमान पर हल्की नारंगी रोशनी बिखरी हुई थी। अनामिका राहुल के कंधे पर सिर रखे खामोशी से उस पल को जी रही थी, मानो वक्त वहीं ठहर गया हो।अनामिका – राहुल, एक बात पूछूँ?राहुल – हाँ, पूछोअनामिका – क्या तुम मुझसे शादी करोगे?राहुल कुछ पल उसे देखता रहा, फिर मुस्कुराते हुए बोलाराहुल – तुम्हें सच में लगता है कि मैं तुम्हें ना कह सकता हूँ?अनामिका के चेहरे पर मुस्कान आ गई। उसने बिना कुछ कहे राहुल को गले लगा लिया |

सीन 4 :

कुछ महीनो बाद पूरे रीति रिवाज के साथ उन दोनों की शादी करादी गई। शादी के बाद गृह प्रवेश के रस्म के दौरान जैसे ही अनामिका ने चावल से भरे कलश को पैरों से गिराया तभी कलश में भरे हुए चावल अचानक से काले पद गए। रिश्तेदारों के बीच ख़ुशपुसाहट दौर गया।राहुल की माँ – हे राम, कैसा अपशगुन है ये मैने समझाया था शादी करने से पहले परिवार वालों के बारे में अच्छे से जान ले। पता नहीं कैसी डायन ले आया है।राहुल – माँ बस भी करो, ये बस एक संजोग थाराहुल की माँ के मुंह से अपने प्रति ऐसे कठोर शब्द सुनके अनामिका का मुंह उतर गया।अनामिका के घर आने के कुछ दिनों बाद राहुल की हर एक लिखी हुई नोवेल्स बेस्टसेलर बन गई एवं राहुल के पिता द्वारा स्थापित ट्रांसपोर्टेशन का बिजनेस ने भी एक तूफानी रफ्तार पकड़ ली थी।जल्द ही राहुल एक बड़े से कोठी में शिफ्ट हो गया। सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था अब राहुल के पास दौलत शौरत नाम सभी चीजें थी। लेकिन एक दिन….

सीन 5 :

नौकरों की चीख से रूम में सो रहे राहुल और अनामिका की आंख खुली। वे दोनों तेजी से आवाज की तरफ भागे पर जो उन्हें वहां पर दिखा उसे देख कर वो स्तब्ध रह गए…फॉर्स पर राहुल की माँ निढाल पड़ी थी। उनका शरीर सर से लेके पांव तक जला हुआ था और गले पर एक बहुत बड़ा छेद था। पिता के गुजर जाने के बाद राहुल की माँ ने ही उसे पाल पोस के बाद किया था और अब उन्हें ऐसी हालत में देख कर राहुल अंदर तक टूट गया।राहुल – माँ… माँ उठो न माँ मत करो न ऐसा माँ, माँ प्लीज उठोअनामिका – मै समझ सकती हु राहुल तुम्हे अभी कैसा महसूस हो रहा होगा लेकिन अब माँ जा चुकी हैमाँ का अंतिम संस्कार करने के बाद मानो राहुल की जिंदगी खत्म सी हो गई थी। जिस घर में कभी उसकी माँ की आवाज गूंजा करती थी अब उसी घर की खामोशी राहुल को अंदर तक खाए जा रही थी। राहुल घंटों अपने कमरे में चुपचाप बैठा रहता। सामने रखी किताबें अब उसे अपनी ओर आकर्षित नहीं करती थीं, खाना सामने रखा रहता लेकिन उसे भूख महसूस नहीं होती थी।

सीन 6 :

एक रात राहुल की नींद अचानक किसी अजीब सी चबाने की आवाज से खुली। कुछ पल तक वह उनींदी आँखो से छत को देखता रहा। फिर उसकी नजर अपने बगल में गई। बिस्तर पर अनामिका नहीं थी। राहुल उठकर बैठ गया, कमरे में चारों तरफ सन्नाटा था, लेकिन वही आवाज अब भी आ रही थी।चर्र… चर्र…राहुल धीरे धीरे बिस्तर से उठा और उस आवाज का पीछा करते हुए बगल वाले कमरे की तरफ बढ़ा, दरवाज़ा थोड़ा सा खुला हुआ था। उसने जैसे ही दरवाज़ को थोड़ा और खोला तो उसके कदम वहीं रुक गए। कमरे के फर्श पर अनामिका किसी दरिंदे की तरह कुछ नोच नोच कर खा रही थी, उसके लंबे खुले बाल फर्श को छू रहे थे और उसके सामने एक काले रंग की कटी फटी बिल्ली पड़ी थी। अनामिका के हाथ और मुंह पर खून की लाली सजी हुई थी।राहुल का पूरा शरीर डर से कांपने लगा, तभी अनामिका के हाथ रुक गए। कुछ पल तक कमरे में खामोशी ने अपना डेरा डाला रखा फिर उसने धीरे धीरे अपना सिर उठाया और अपनी गर्दन एक झटके से 180° राहुल के ओर मोड दी।लेकिन अब वह वो अनामिका नहीं थी जिसको राहुल ने शादी करके घर लाया था। उसके 2 फिट लंबी जीभ से लाल खून टप-टप करके टपक रहा था. उसकी चमड़ी पीली पड़ चुकी थी और आंखों की पुतली सुर्ख सफेद।

सीन 7 :

अनामिका धीरे धीरे खड़ी हुई, उसके पैर जमीन से ऊपर उठ गए और देखते ही देखते उसका शरीर हवा में तैरने लगा। खुली जुल्फे हवा में लहराती हुईं राहुल की ओर बढ़ने लगी, अनामिका ने एक झटके से अपनी लंबी चोटी राहुल की ओर बढ़ाई और अगले ही पल उसकी चोटी साँप की तरह राहुल की गर्दन के चारों ओर लिपट गई और उसे कसकर दबोच लिया। धीरे धीरे अनामिका राहुल के करीब आई, उसकी चोटी अब भी राहुल की गर्दन जकड़े हुए थी। अनामिका – बहुत शौख था न तेरे बाप को किच्चिन रखने का। ले देख तेरे सामने हु मैं।राहुल – किच्चिन??अनामिका – लाचार थी मेरी गर्भवती माँ पर तेरे बाप ने जरा भी तरस नहीं खाई। ऐसा क्या पैसों का भूत चढ़ा था साले के सिर पर।अनामिका अचानक जोर-जोर से शैतानी ठहाके लगाने लगी, उसकी डरावनी हँसी पूरे कमरे में गूँज उठी, मानो वर्षों से दबा हुआ कोई बदला अब अपने अंजाम तक पहुँचने वाला हो। अनामिका ने अपनी लंबी, काली जीभ बाहर निकाली और धीरे धीरे उसे राहुल के गले की ओर बढ़ाने लगी। राहुल डर से आँखें बंद कर चीख पड़ा। लेकिन तभी घर के मुख्य गेट से काले वस्त्र पहने कुछ अघोरी अंदर दाखिल हुए। उनके हाथों में ढोल एवं ताशे थे जिनकी तेज आवाज के बीच सोहर गीत चिल्लाते हुए गाया जा रहा था।सोहर गीत की आवाज कानो में पड़ते ही अनामिका ने राहुल की गर्दन से अपनी पकड़ छोड़ दी और दर्द से तड़पते हुए जोर जोर से चीखने लगी। तभी एक अघोरी ने अपने हाथों में रखा अभिमंत्रित जल का कमंडल उसकी ओर फेंक दिया। जल के शरीर पर पड़ते ही अनामिका ने एक पर्दे फाड़ देने वाली चीख मारी जिसकी आवाज से पूरा घर गूँज उठा। देखते ही देखते अनामिका अपने विकराल रूप में आगाई, उसके हाथ पैर अजीब तरीके से मुड़ने लगे। कुछ ही पलो में पूरे घर का माहौल किसी भयानक मौत के तमाशे में बदल चुका था। उसने अपनी शक्तियों से घर का एक एक सामान हवा में उठा लिया। कुर्सियाँ, मेज, बर्तन और दूसरी चीजें हवा में घूमने लगी। फिर उसने उन सभी सामानों को एक जगह इकट्ठा किया और पूरी ताकत से अघोरियों की ओर फेंक दिया। लेकिन अघोरियों ने सोहर गीत गाना बंद नहीं किया।गीत की आवाज लगातार पूरी कोठी में गूँजती रही और धीरे धीरे अनामिका की शक्ति कमजोर पड़ने लगी और वो निढाल होकर जमीन पर बेहोश होके गिर पड़ी। बेहोश होते ही एक अघोरी अपने हाथ में चाँदी का अस्तूरा लिये अनामिका की ओर बढ़ा। उसके पास पहुँचकर उसने अस्तूरे से अनामिका के सिर से कुछ बाल काटे और उन्हें सावधानीपूर्वक एक कलश में रख दिया।

सीन 8 :

अघोरी: ये सब तुम्हारे पिता की करतूत है।राहुल: मेरे पिता की? लेकिन कैसे?अघोरी: ये बात तुम्हारे जन्म से भी पहले की है जब तुम्हारे पिता ने पहली बार ट्रांसपोर्टेशन के बिजनेस में कदम रखा था, शुरुआत में सब कुशल मंगल चल रहा था। लेकिन कुछ समय बाद बिजनेस में लगातार भारी नुकसान होने लगा। कर्ज इतना बढ़ गया कि घर तक बेचने की नौबत आ गई। पर एक दिन उन्हे किसी से किच्चिन के बारे में पता चला। बिहार की पौराणिक गाथाओं के अनुसार अगर किसी गर्भवती स्त्री की मृत्यु जलने के कारण हो जाए तो उसकी आत्मा किच्चिन का रूप धारण कर लेती है। किच्चिन बाकियों से अलग होती है। जो व्यक्ति उसे साध ले, उसे वह धन-दौलत, नाम और शोहरत से परिपूर्ण कर देती है। इसी सिद्धि को पाने के लिए तुम्हारे पिता ने पास वाले ही नदी के पास एक गर्भवती औरत को जिंदा जला दिया।राहुल : लेकिन उससे इसका क्या लेना देना??अघोरी : लेना देना है, ये लड़की जिसे तुम अपनी पत्नी बनाकर लाए हो वो और कोई नहीं बल्कि उसी औरत की बड़ी बेटी है। और इसने अपनी माँ की चीखे खुद अपने कानों से सुनी है।दूसरा अघोरी: एक किच्चिन सब कुछ भूल सकती है लेकिन अपना बदला कभी नहीं भूलती। चाहे उसे सैकड़ों साल ही क्यों न लग जाएँ, वो अपना बदला लेकर ही रहती है। किसी न किसी के शरीर का सहारा लेकर वो इस दुनिया में लौटती है और अपने अधूरे बदले को पूरा करके ही वापस जाती है।

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