अधूरी दोस्ती: हॉस्पिटल की आत्मा
__जी. पी डोरिया __लक्ष्मी जायसवाल रात के बारा बजने आए थे । हॉस्पिटल की लॉबी लगभग खाली थी। कही कोई […]
__जी. पी डोरिया __लक्ष्मी जायसवाल रात के बारा बजने आए थे । हॉस्पिटल की लॉबी लगभग खाली थी। कही कोई […]
—लक्ष्मी जायसवाल गाँव के बाहर, एक टूटी-फूटी सड़क के अंत में खड़ा था शर्मा विला—एक पुराना, खंडहर बन चुका घर
—लक्ष्मी जायसवाल गाँव का वो टूटा-फूटा घर अब बस एक डरावनी याद बन चुका था। दीवारों की मिट्टी झड़ चुकी
—जी.पी डोरिया दिन दहाड़े भी लोग, उस गली से गुजरने में डरते थे। बच्चे तो कभी उस और से जाते
✒️—जी.पी डोरिया ✒️—लक्ष्मी जायसवाल रात के ठीक 12 बजे, रागिनी अपने कमरे में अकेली पढ़ाई कर रही थी। खिड़की से
—✒️जी.पी डोरिया —✒️लक्ष्मी जायसवाल ( गहरी सांस लेते हुए ) जैमिन – भाभी आप…!आप यहां क्या कर रही हो इतनी
“खंडहर की छाया: भूतनी की रात” — ✒️जी.पी डोरिया —✒️लक्ष्मी जायसवाल लोग कहते है कि, गांव की बाहर पुरानी सड़क