रात की ट्रेन और वह साया
_लक्ष्मी जायसवाल सालों पहले की बात है। सर्दियों की एक रात थी, जब राघव दिल्ली से लखनऊ जाने वाली आखिरी […]
_लक्ष्मी जायसवाल सालों पहले की बात है। सर्दियों की एक रात थी, जब राघव दिल्ली से लखनऊ जाने वाली आखिरी […]
_लक्ष्मी जायसवाल रात के ठीक 12 बजे रवि अपने कैमरे के साथ ‘शमशानपुर जंक्शन’ पहुँचा। यह स्टेशन 25 साल पहले
__लक्ष्मी जायसवाल उत्तर प्रदेश के भैरवपुर गाँव की गिनती भले ही आम गाँवों में होती हो, लेकिन यहाँ की एक
—लक्ष्मी जायसवाल रात के ठीक बारह बजे, जब पूरा गाँव गहरी नींद में सोया हुआ था, लक्ष्मी अपने गाँव करेली
—लक्ष्मी जायसवाल उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव भेरवा में एक पुराना खेत था जिसे गांववाले “शापित खेत” कहते
__जी. पी डोरिया __लक्ष्मी जायसवाल रात के बारा बजने आए थे । हॉस्पिटल की लॉबी लगभग खाली थी। कही कोई
होकर दुनिया से दूर मैं,खामोश सी रहने लगी थी,जो था कोई अपना सा मेरा, अब उससे खफा सी थी।
—लक्ष्मी जायसवाल गाँव के बाहर, एक टूटी-फूटी सड़क के अंत में खड़ा था शर्मा विला—एक पुराना, खंडहर बन चुका घर