छाया
—लक्ष्मी जायसवाल आधी रात को बजती घड़ी,हर साया लगता अनदेखी छड़ी। बत्ती जले तो बुझ जाए,पीछे कोई सांसें गिन जाए। […]
—लक्ष्मी जायसवाल आधी रात को बजती घड़ी,हर साया लगता अनदेखी छड़ी। बत्ती जले तो बुझ जाए,पीछे कोई सांसें गिन जाए। […]
—जी.पी डोरिया दिन दहाड़े भी लोग, उस गली से गुजरने में डरते थे। बच्चे तो कभी उस और से जाते
—जी.पी डोरिया —लक्ष्मी जायसवाल अक्षय – आदर्श…. आ बैठ जल्दी गाड़ी में । पास वाले गांव में एक काम निपटा
— जी.पी डोरिया —लक्ष्मी जायसवाल रात के तकरीबन डेढ़ बजने आए थे । ढलती हुई रात…. उस खुशनुमा माहौल के
“भूतिया लेखनी के मास्टर बनें!” डरावनी कहानी और कविता प्रतियोगिता प्रतियोगिता श्रेणियाँ: 10 डरावनी कहानी (500 शब्दों तक) 10 डरावनी
—सिद्दीकी रुखसाना एक भयानक रात अब्बा जान मैं जन्नत से बोल रही हूं,मैं आप की प्रिय बेटी लाडो बोल रही
मैं न जीता हूँ, न मरता,फिर भी रात को सबको डराता।न शरीर है, न आवाज़,पर सन्नाटे में आता हूँ पास।आइने
—लक्ष्मी जायसवाल कहते हैं प्रेम स्वर्ग बनाता है, और विश्वासघात नर्क का द्वार खोलता है। पर अगर प्रेम ही नर्क
मुंबई की शामें जब धुंध में लिपटने लगती हैं और समंदर की लहरें किसी भूली-बिसरी कहानी की तरह किनारे से
मुंबई की चहल-पहल और भीड़भाड़ से दूर, समुद्र की लहरों के किनारे एक वीरान किला खड़ा है — शिवड़ी फ़ोर्ट।