“दस्तक 2:13”मुंबई की एक पुरानी इमारत में सस्ते किराए पर मिला फ्लैट आरव के लिए नई शुरुआत जैसा था, लेकिन जल्द ही उसे महसूस होने लगा कि इस घर में कुछ अजीब है। हर रात ठीक 2:13 बजे दरवाज़े पर हल्की दस्तक सुनाई देती—धीमी, मगर साफ़। पहले उसने इसे भ्रम समझा, लेकिन जब यह लगातार होने लगा, तो उसके भीतर डर घर करने लगा।एक रात उसने हिम्मत करके दरवाज़ा खोल दिया, पर बाहर सन्नाटा था। अगली रात, दरवाज़ा बिना छुए अपने आप खुलने लगा, और इस बार उसने उसे देखा—सफेद साड़ी में एक औरत, जिसके बाल चेहरे को ढक रहे थे और पैर उल्टे थे। उसकी काली आंखें सीधे आरव को घूर रही थीं, और उसकी आवाज़ गूंजी—“यह मेरा कमरा है…”डर से कांपते हुए आरव ने अगले दिन वॉचमैन से पूछा, तब उसे पता चला कि सालों पहले इसी कमरे में एक लड़की ने आत्महत्या की थी। यह जानकर उसने तुरंत फ्लैट छोड़ने का फैसला किया, लेकिन उसकी आखिरी रात सबसे भयानक साबित हुई। घड़ी ने जैसे ही 2:13 बजाए, लाइट बंद हो गई और दरवाज़ा अपने आप खुल गया।वह औरत धीरे-धीरे उसके पास आई, और आरव भाग नहीं पाया। अगली सुबह उसकी लाश कमरे में मिली, और दीवार पर खून से लिखा था—“अब यह कमरा फिर से मेरा है…”। कहते हैं, आज भी उस फ्लैट में हर रात वही दस्तक सुनाई देती है, और जो दरवाज़ा खोलता है… वह कभी वापस नहीं आता।
