कफन वाला
—लक्ष्मी जायसवाल गाँव का वो टूटा-फूटा घर अब बस एक डरावनी याद बन चुका था। दीवारों की मिट्टी झड़ चुकी […]
—लक्ष्मी जायसवाल गाँव का वो टूटा-फूटा घर अब बस एक डरावनी याद बन चुका था। दीवारों की मिट्टी झड़ चुकी […]
डॉ. लक्ष्मी जायसवाल बेतालपुर गाँव के बाहर, पीपल के घने पेड़ों के बीच एक पुरानी बावड़ी थी। खंडहरनुमा सीढ़ियाँ, पानी
✒️—Siddiqui Rukhsana सुनसान सी गलियों में, मैं खुद को ढूंढ रही हूं,क्या खो गई हूँ खुद में ,सवाल खुद से
—जी.पी डोरिया —डॉ. लक्ष्मी जायसवाल तेरे मेरे होठों पेमीठे मीठे गीत मितवाआगे आगे चले हमपीछे पीछे प्रीत मितवा… चांदनी रात
—लक्ष्मी जायसवाल आधी रात को बजती घड़ी,हर साया लगता अनदेखी छड़ी। बत्ती जले तो बुझ जाए,पीछे कोई सांसें गिन जाए।
—जी.पी डोरिया दिन दहाड़े भी लोग, उस गली से गुजरने में डरते थे। बच्चे तो कभी उस और से जाते
—जी.पी डोरिया —लक्ष्मी जायसवाल अक्षय – आदर्श…. आ बैठ जल्दी गाड़ी में । पास वाले गांव में एक काम निपटा
— जी.पी डोरिया —लक्ष्मी जायसवाल रात के तकरीबन डेढ़ बजने आए थे । ढलती हुई रात…. उस खुशनुमा माहौल के
“भूतिया लेखनी के मास्टर बनें!” डरावनी कहानी और कविता प्रतियोगिता प्रतियोगिता श्रेणियाँ: 10 डरावनी कहानी (500 शब्दों तक) 10 डरावनी
—सिद्दीकी रुखसाना एक भयानक रात अब्बा जान मैं जन्नत से बोल रही हूं,मैं आप की प्रिय बेटी लाडो बोल रही