कहानी का नाम – चिरिकुन्नी, लेखक शुभ्रांशु राउत
यह कहानी ओडिशा के एक छोटे से गाँव देउलबाद की है। यह गाँव शहर से थोड़ा दूर था। गाँव में […]
यह कहानी ओडिशा के एक छोटे से गाँव देउलबाद की है। यह गाँव शहर से थोड़ा दूर था। गाँव में […]
यह घटना उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हुई थी। तीन लड़के अपने दोस्त का जन्मदिन मनाने गए थे। जब वे
साल 1994 में दिल्ली के मेहरौली इलाके में एक पुराने और उजड़े से बंगले के पास कुछ मजदूर काम कर
यह कहानी रमेश यादव नाम के व्यक्ति की है, जो रेलवे में गार्ड की नौकरी करते थे। उन्हें अक्सर रात
मुंबई के उपनगर में एक पुरानी इमारत है – ‘शिव सदन’। एक संकरी, अंधेरी गली में छिपी हुई यह बिल्डिंग
राजस्थान की भूमि जहां एक ओर वीरों के साहस की गाथाएँ बिखरी हैं, वहीं दूसरी ओर वहां की रेत में
स्थान: पाथुरिया घाट, नदिया ज़िला, पश्चिम बंगालसाल: 2003 कहानी शुरू होती है… 2003 की बात है। नदिया ज़िले के एक
डॉ. लक्ष्मी जायसवाल बेतालपुर गाँव के बाहर, पीपल के घने पेड़ों के बीच एक पुरानी बावड़ी थी। खंडहरनुमा सीढ़ियाँ, पानी
मुंबई की चहल-पहल और भीड़भाड़ से दूर, समुद्र की लहरों के किनारे एक वीरान किला खड़ा है — शिवड़ी फ़ोर्ट।
In a small village called Dharmapur, hidden between hills and dense forests, there stood an ancient banyan tree. The tree