Horror Poem

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पीपल की छाँव

_लक्ष्मी जायसवाल पीपल की छाँव तले मत जाना,बूढ़े लोग बार-बार समझाते थे।वो कहते—दिन में पेड़, रात में क़ैदखाना,जहाँ साया नहीं,

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काली रात

✒️—Siddiqui Rukhsana सुनसान सी गलियों में, मैं खुद को ढूंढ रही हूं,क्या खो गई हूँ  खुद में ,सवाल खुद से

Horror Poem

छाया

—लक्ष्मी जायसवाल आधी रात को बजती घड़ी,हर साया लगता अनदेखी छड़ी। बत्ती जले तो बुझ जाए,पीछे कोई सांसें गिन जाए।

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