रात की चीख
कविता: “रात की चीख़” लेखक: अंकित शर्मा रात ढली, गांव की गलियाँ सुनसान, हवा में घुली थी डर की बेज़बान […]
कविता: “रात की चीख़” लेखक: अंकित शर्मा रात ढली, गांव की गलियाँ सुनसान, हवा में घुली थी डर की बेज़बान […]
डॉ. लक्ष्मी जायसवाल को “विद्या वाचस्पति” डॉक्टरेट उपाधि से सम्मानित नई दिल्ली। नई दिल्ली स्थित पंचतारा होटल रेडिसन ब्लू में
—लक्ष्मी जायसवाल रात के ठीक बारह बजे, जब पूरा गाँव गहरी नींद में सोया हुआ था, लक्ष्मी अपने गाँव करेली
—जी.पी डोरिया —डॉ. लक्ष्मी जायसवाल तेरे मेरे होठों पेमीठे मीठे गीत मितवाआगे आगे चले हमपीछे पीछे प्रीत मितवा… चांदनी रात
—जी.पी डोरिया —लक्ष्मी जायसवाल अक्षय – आदर्श…. आ बैठ जल्दी गाड़ी में । पास वाले गांव में एक काम निपटा
— जी.पी डोरिया —लक्ष्मी जायसवाल रात के तकरीबन डेढ़ बजने आए थे । ढलती हुई रात…. उस खुशनुमा माहौल के
—लक्ष्मी जायसवाल कहते हैं प्रेम स्वर्ग बनाता है, और विश्वासघात नर्क का द्वार खोलता है। पर अगर प्रेम ही नर्क
मुंबई की शामें जब धुंध में लिपटने लगती हैं और समंदर की लहरें किसी भूली-बिसरी कहानी की तरह किनारे से
In a small village called Dharmapur, hidden between hills and dense forests, there stood an ancient banyan tree. The tree