कुएं वाली बच्ची का रहस्य
एक अंधेरी और सन्नाटे से भरी रात में राहुल और उसका दोस्त विनय गाँव के एक वीरान कुएँ के पास से गुजर रहे थे। चारों तरफ गहरा अंधेरा और खौफनाक सन्नाटा फैला हुआ था। तभी अचानक उस सन्नाटे को चीरती हुई एक छोटी बच्ची के रोने की आवाज सुनाई देने लगी। दोनों वहीं ठिठक कर खड़े हो गए।राहुल ने जब गौर से सुना तो उसके रोंगटे खड़े हो गए — वह आवाज़ उसी वीरान कुएँ के अंदर से आ रही थी। राहुल डर के मारे काँपने लगा और घबराकर बोला, “चल विनय, जल्दी निकल यहाँ से! आज हम बुरी तरह फँस गए हैं। वह हमें नहीं छोड़ेगी अगर उसको पता चला कि हम यहाँ से गुजर रहे हैं, तो वह हमें कच्चा खा जाएगी!”विनय ने हैरान होकर पूछा, “क्या हुआ राहुल? कौन सी आवाज़ आ रही है? मुझे तो कोई आवाज़ सुनाई नहीं दे रही।”राहुल का माथा पसीने से तर हो गया, “क्या तुम्हें कोई आवाज़ सुनाई नहीं दे रही? इतनी ज़ोर-ज़ोर से वह बच्ची रो रही है!” विनय बोला, “नहीं यार, मुझे कोई आवाज़ नहीं दे रही। लगता है तुझे पार्टी की शराब ज़्यादा चढ़ गई है।”राहुल बोला, “मुझे कोई नशा नहीं चढ़ा है! कहते हैं उस कुएँ से जो बच्ची रोती है, उसकी आवाज़ सिर्फ उसी को सुनाई देती है जिसे वह अपने साथ ले जाना चाहती है। आज मेरा नंबर लग गया है।”विनय ने पूछा, “कौन ले जाती है भाई? और कौन सी बच्ची? आखिर क्यों?”तब राहुल ने उस गाँव के भयानक अतीत की कहानी सुनानी शुरू की।”कहते हैं वह बच्ची इसी गाँव में रहती थी। जब वह महज़ एक साल की थी, तब उसके माता-पिता की एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। उसके बूढ़े दादा-दादी ने उसका पालन-पोषण किया। लेकिन जब बच्ची 4 साल की हुई, तो दादा-दादी भी बुढ़ापे के कारण चल बसे। अब उस बेचारी मासूम का कोई नहीं बचा।””गाँव वालों ने मदद करने के बजाय उसे अशुभ मान लिया। वह छोटी सी मासूम खुद ही अपना सहारा थी। खुद कुएँ से पानी लाती, खुद जंगल से लकड़ियाँ लाती। गाँव वालों को लगा इतनी छोटी उम्र में इतनी समझ कैसे? जरूर ये किसी चुड़ैल की बेटी है।””अंधविश्वास में एक दिन गाँव वालों ने मिलकर उसके घर को आग लगा दी। बेचारी बच्ची अपनी रक्षा नहीं कर सकी। गाँव वालों ने उसकी लाश को कुएँ में फेंक दिया और कुएँ को मंत्रित धागों से बाँध दिया ताकि उसकी आत्मा बाहर न आ सके।””एक दिन गाँव का एक छोटा लड़का खेलते-खेलते वहाँ पहुँचा। उसकी गेंद कुएँ में गिर गई। उसने धागा हटाकर अंदर झाँका तो नीचे एक लड़की उसकी गेंद पकड़कर खेल रही थी। उसने लड़के को पास बुलाया और खींचकर अंदर ले लिया। वह कुएँ में ओझल हो गई।””उसी रात कुएँ से दिल दहला देने वाली आवाजें आने लगीं, जैसे एक साथ दस बच्चे रो रहे हों। सुबह हुई तो गाँव से तीस लोग गायब थे। एक प्रत्यक्षदर्शी ने काँपते हुए बताया कि रात को जो लोग उस आवाज के पीछे गए, वे सम्मोहित होकर सीधे कुएँ में कूद गए। कुएँ का मंत्रित धागा टूट चुका था।”यह कहानी सुनते ही विनय के पैर काँपने लगे, क्योंकि राहुल को तो सिर्फ आवाज़ सुनाई दे रही थी, लेकिन विनय को वह बच्ची सीधे सामने दिखाई दे रही थी!तभी अचानक उस बच्ची ने भयानक रूप धारण किया और राहुल के ऊपर झपट पड़ी। वह राहुल को घसीटते हुए कुएँ के अंदर ले जाने लगी।तभी कुछ ऐसा हुआ जिसकी उम्मीद नहीं थी। विनय फूट-फूटकर रोने लगा और चिल्लाया, “बहन! अब छोड़ दे यह सब! क्यों कर रही हो? मुझे माफ़ कर दे, मैं तुझे बचा नहीं पाया!”दरअसल, विनय कोई और नहीं बल्कि उस बच्ची — जिसका नाम रिया था — का सगा भाई था। बचपन में जब रिया एक साल की थी, तब उसके माता-पिता उसे दादा-दादी के पास छोड़कर विनय को शहर स्कूल में एडमिशन दिलाने ले जा रहे थे। रास्ते में दुर्घटना हुई जिसमें माता-पिता की मौत हो गई। विनय बच गया पर सिर पर चोट से उसकी याददाश्त चली गई। एक दयालु परिवार उसे ले गया।जब विनय बड़ा हुआ तो उसकी याददाश्त वापस आ गई। उसे रोज सपने में वही गाँव और वही कुआँ दिखता जहाँ एक बच्ची रो रही है। खोज करने पर उसे सारा सच पता चला। वह अपनी बहन की आत्मा को मुक्ति दिलाने के लिए ही राहुल के साथ आया था। उसने राहुल से कहा था कि शराब पीने का नाटक करना, और जब आवाज सुनाई दे तो इशारा करना। विनय के पास एक पवित्र तावीज था।विनय की आवाज सुनकर रिया ठहर गई। वह विनय के पीछे आकर रोने लगी, “तुम लोगों ने मुझे क्यों मारा? मुझे क्यों जलाया?”विनय बोला, “रिया बहन, माफ करना, मैं तुम्हें बचा नहीं पाया। मैं तुम्हारा भाई हूँ।”विनय ने सारा सच बताया। सच सुनते ही रिया फूट-फूटकर रोने लगी और अपने भैया के गले लग गई।विनय ने धीरे से वह तावीज निकाला और रिया के गले में पहना दिया। नम आँखों से बोला, “जा बहन, अब मुक्त हो जा। हो सके तो मुझे माफ करना और अगले जन्म में मेरी बेटी बनकर पैदा होना।”तावीज पहनते ही रिया का खौफनाक रूप शांत हो गया। सारा क्रोध मिट गया और वह एक चमकता हुआ सितारा बनकर आसमान की ओर उड़ गई।उस रात के बाद से उस गाँव में और उस वीरान कुएँ से फिर कभी किसी बच्ची के रोने की आवाज सुनाई नहीं दी।
