Horror & Play

सन्नाटा – मयंक

सन्नाटा 111

मुंबई के पुराने औद्योगिक इलाके में एक पुराना अपार्टमेंट ब्लॉक था, जिसे लोग “111” कहते थे। इसका नंबर हमेशा डरावना महसूस कराता था। यहाँ कोई लंबे समय से नहीं रहता था। पड़ोसियों का कहना था कि रात को वहाँ अजीब आवाज़ें आती हैं—किसी के कदम, फुसफुसाहट और कभी-कभी कोई चीख।आनंद, 24 साल का युवक, शहर में अकेला रहता था और अजीब जगहों का शौक रखता था। उसे डरावनी कहानियाँ पढ़ने और ऐसे पुराने घरों में जाना पसंद था। उसने सोचा कि “111” का रहस्य जानना उसके लिए चुनौती होगी।एक शाम, आनंद ने अपना बैग लिया, टॉर्च ऑन की और अपार्टमेंट ब्लॉक 111 की ओर बढ़ा। पास पहुँचते ही उसे अजीब ठंडक महसूस हुई। हवा में कुछ ऐसा था, जो उसके बालों की जड़ तक सिहरन पैदा कर रहा था।दरवाजा धूल और जालों से ढका हुआ था। जैसे ही उसने धक्का दिया, दरवाजा चरमराकर खुला। अंदर का दृश्य और भी डरावना था—दीवारों पर अजीब निशान, टूटे फर्श और छत से टपकती बूंदें।आनंद धीरे-धीरे सीढ़ियों से ऊपर गया। हर कदम पर धूल उड़ती और कहीं से फुसफुसाहट की आवाज़ आती। उसने सोचा कि शायद उसकी कल्पना है, लेकिन आवाज़ें बढ़ती ही जा रही थीं।तीसरे फ्लोर पर पहुँचते ही आनंद को एक कमरा दिखाई दिया। दरवाजे पर लिखा था—“कक्ष 7।” जैसे ही उसने दरवाजा खोला, अंदर एक पुरानी डायरी और टूटी हुई घंटी पड़ी थी। डायरी खोलते ही उसे पता चला कि यह अपार्टमेंट पहले एक वैज्ञानिक का था, जिसने रहस्यमय प्रयोग किए थे।डायरी में लिखा था कि वैज्ञानिक ने आत्माओं के साथ संपर्क बनाने के लिए मशीन बनाई थी। लेकिन एक रात, कुछ गड़बड़ हो गई और सभी रहस्यमय घटनाओं की शुरुआत हुई। उसके बाद से कोई भी यहाँ लंबे समय तक नहीं रह पाया।आनंद पढ़ते-पढ़ते महसूस करने लगा कि कमरे में हवा अचानक ठंडी हो गई है। टॉर्च की रोशनी झपकने लगी और कमरे की परछाइयाँ हिलने लगीं। अचानक, डायरी खुद-ब-खुद फड़फड़ाई और पन्ने अपने आप उलटे।फुसफुसाहट तेज़ हो गई। आनंद ने देखा कि दीवार पर सफेद धुंध जैसी आकृति बन रही है, धीरे-धीरे उसकी ओर बढ़ रही थी। वह चीखना चाहा, लेकिन आवाज़ बंद हो गई।आकृति ने धीरे से कहा, “क्यों आए हो यहाँ? तुम्हें पता नहीं कि यह जगह मृतकों की है।”आनंद ने हिम्मत जुटाकर कहा, “मैं सच जानना चाहता था।”तभी अचानक कमरे के बीचों-बीच से एक ठंडी हवेली जैसी धुंध निकली और कमरे को घेर लिया। वह महसूस कर रहा था कि मशीन, डायरी और आकृति किसी रहस्यमय ऊर्जा से जुड़ी थी।आनंद ने डायरी में लिखे नोट्स पढ़कर कोशिश की कि ऊर्जा को शांत करे। उसने धीरे-धीरे कहा, “जो भी रहस्य है, शांति पाओ। मुझे जाने दो।”कमरे में सन्नाटा छा गया। धुंध धीरे-धीरे गायब हो गई और आकृति भी शांत हो गई। टॉर्च की रोशनी स्थिर हुई। आनंद ने महसूस किया कि उसने रहस्य तो जान लिया, लेकिन अपार्टमेंट के दरवाजे अब उसके लिए हमेशा के लिए बंद हो गए थे।अगले दिन, पड़ोसी फिर से सुनाई देने वाली आवाज़ की बात कर रहे थे। लेकिन आनंद वहां नहीं था। उसने समझ लिया कि कुछ रहस्य ऐसे होते हैं, जिन्हें जानने के बाद भी कोई पूरी तरह से सुरक्षित नहीं रह सकता।

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