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डॉ. लक्ष्मी जायसवाल को पं. दीनदयाल उपाध्याय हिंदी विद्यापीठ, वृंदावन धाम (मथुरा) द्वारा “विद्यावाचस्पति” उपाधि से सम्मानित किया गया।

डॉ. लक्ष्मी जायसवाल को “विद्या वाचस्पति” डॉक्टरेट उपाधि से सम्मानित

नई दिल्ली।

नई दिल्ली स्थित पंचतारा होटल रेडिसन ब्लू में आयोजित एक भव्य एवं गरिमामयी समारोह में पं. दीनदयाल उपाध्याय हिंदी विद्यापीठ द्वारा हिंदी साहित्य, समाजसेवा और सृजनात्मक लेखन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान हेतु डॉ. लक्ष्मी राजकुमार जायसवाल को “विद्या वाचस्पति” डॉक्टरेट उपाधि प्रदान की गई।

इस राष्ट्रीय स्तर के समारोह में देशभर से लेखक, विद्वान, कलाकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। मंच पर मुख्य अतिथियों के रूप में डॉ. उमेश कुलकर्णी, डॉ. श्रेया गायकवाड़, डॉ. शीतल गावंडे, एवं सुप्रसिद्ध संगीतकार श्रीमती संगीता गावंडे सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।


हालांकि डॉ. लक्ष्मी जायसवाल स्वास्थ्य कारणों से समारोह में स्वयं उपस्थित नहीं हो सकीं, लेकिन संस्था ने उनके कार्यों को आदरपूर्वक स्वीकार करते हुए उन्हें डॉक्टरेट उपाधि, प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिन्ह कुरियर द्वारा प्रेषित कर सम्मानित किया।
डॉ. लक्ष्मी की लेखनी समाज और साहित्य के कई महत्वपूर्ण पहलुओं को छूती है। उनकी प्रमुख रचनाओं में “मुझे पहचानो: एक विश्लेषण” (सती प्रथा पर आधारित), “एक और द्रोणाचार्य: एक मूल्यांकन”, और “डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी: हौसले की उड़ान” शामिल हैं, जिनके माध्यम से उन्होंने शैक्षणिक भ्रष्टाचार, नारी विमर्श और ट्रांसजेंडर अधिकारों जैसे विषयों को प्रभावी ढंग से उठाया है।

सम्मान मिलने पर डॉ. लक्ष्मी ने कहा –
“यह मेरे लिए अत्यंत गर्व और भावनाओं से भरा हुआ क्षण है। ‘विद्या वाचस्पति’ जैसी मानद उपाधि मेरे साहित्यिक और सामाजिक योगदान का मूल्यांकन है। इस सम्मान का श्रेय मैं अपनी माँ श्रीमती सुनीता जायसवाल, मेरी गुरु डॉ. सन्देशा भावसार, मार्गदर्शक डॉ. शिवाजी रामभाऊ शिंदे तथा अपने सभी पाठकों और शुभचिंतकों को देती हूँ, जिनके सहयोग और आशीर्वाद से मैं इस मुकाम तक पहुँची हूँ।”

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