दीवार के पीछे — अर्जुन मेहरा

लेखक का नाम: अर्जुन मेहरा
अर्जुन को बचपन से भूत-प्रेत और रहस्यमयी जगहों पर लिखना पसंद है। खाली समय में वे हॉरर फिल्में देखते हैं और उन्हीं से प्रेरित होकर कहानियाँ गढ़ते हैं।

यह कहानी अर्जुन मेहरा द्वारा लिखित है —

रात के दो बजे थे। आराधना नींद में अचानक जाग गई। उसे लगा जैसे कमरे की दीवार के पीछे कोई धीरे-धीरे खुरच रहा है। पहले उसने सोचा शायद चूहा होगा, लेकिन आवाज़ तेज़ होती गई—खर्र-खर्र-खर्र…।

उसने डरते-डरते हाथ दीवार पर रखा। दीवार ठंडी थी, मगर अंदर से किसी ने जोर से खटखटाया। उसकी चीख गले में ही अटक गई।

साहस जुटाकर आराधना ने टॉर्च जलाई। रोशनी पड़ते ही उसने देखा—दीवार पर ताज़ा उभरे खून जैसे धब्बे धीरे-धीरे नीचे की ओर बह रहे थे।

अचानक वही खुरचने की आवाज़ उसके कान के पास गूँजी। वह दीवार से पीछे हटी तो देखा, दीवार पर दरार उभर चुकी थी… और उस दरार से किसी के हाथ बाहर आने की कोशिश कर रहे थे।

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