लेखिका :लक्ष्मी जायसवाल
नेहा को एक रहस्यमयी ईमेल मिला:
“अगर तुम्हें सच्चा डर देखना है, तो ‘काली खाई’ जाओ, लेकिन ध्यान रहे – रात 12 बजे पीछे पलटकर मत देखना।”
नेहा को लगा कोई फैन मज़ाक कर रहा है, लेकिन फिर भी कैमरा लेकर वह “काली खाई” पहुँच गई – एक वीरान, सुनसान घाटी जहाँ कोई सूरज ढलने के बाद नहीं जाता।
रात के 11:45 बजे नेहा ने रिकॉर्डिंग शुरू की। अजीब-सी ठंडी हवा चल रही थी। चारों ओर सन्नाटा था, बस कभी-कभी झाड़ियों में सरसराहट होती थी।
11:59…
कैमरे में अचानक एक काली परछाईं दिखी।
नेहा ने पूछा: “कौन है वहाँ?”
कोई जवाब नहीं आया।
12:00 बजते ही उसके मोबाइल पर फिर वही ईमेल आया:
“अब जो होगा, वो सिर्फ़ कैमरे में दिखेगा, असल में नहीं। लेकिन… पलटकर मत देखना!”
नेहा आगे चलती रही, लेकिन अब उसके कदम भारी हो रहे थे। ऐसा लग रहा था जैसे कोई उसके पीछे-पीछे चल रहा है। साँसें तेज़ होने लगीं। लेकिन हिम्मत करके वह रुकी नहीं।
फिर…
उसने सुना – कोई धीरे से फुसफुसा रहा था:
“पलट जा…”
“हम यहीं हैं…”
नेहा डर के मारे कांप रही थी, लेकिन वह नहीं पलटी।
तभी अचानक कैमरा बंद हो गया।
अगली सुबह गांववालों ने नेहा का कैमरा घाटी के किनारे पाया। उसमें सिर्फ एक आखिरी रिकॉर्डिंग थी।
वह वीडियो 20 सेकंड का था।
नेहा का चेहरा कैमरे की तरफ था। उसके पीछे कोई नहीं था… लेकिन जब उसने कहा:
“मैं ठीक हूँ, मैं बाहर आ रही हूँ…”
…तभी अचानक पीछे से दो सड़े हुए हाथ उसके गले में लिपटते हैं।
नेहा चिल्लाती है:
“कहा था ना पलटना मत…!”
वीडियो यहीं कट हो गया।
नेहा फिर कभी नहीं मिली।



