मैं न जीता हूँ, न मरता,
फिर भी रात को सबको डराता।
न शरीर है, न आवाज़,
पर सन्नाटे में आता हूँ पास।
आइने में कभी-कभी दिख जाऊँ,
पर हाथ लगाओ तो गायब हो जाऊँ।
बोलो कौन हूँ मैं?
अपना जवाब कमेंट में लिखें… क्या आप सच्चे बहादुर हैं?
मैं न जीता हूँ, न मरता,
फिर भी रात को सबको डराता।
न शरीर है, न आवाज़,
पर सन्नाटे में आता हूँ पास।
आइने में कभी-कभी दिख जाऊँ,
पर हाथ लगाओ तो गायब हो जाऊँ।
बोलो कौन हूँ मैं?
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