Horror Story

सीढ़ियों के नीचे — सतीश कुमार

रात के 12 बजे का समय था। नेहा अकेली अपने पुराने मकान में पढ़ाई कर रही थी। अचानक बिजली चली गई और पूरा घर अंधेरे में डूब गया। उसने मोबाइल की टॉर्च ऑन की और नीचे पानी पीने रसोई की ओर गई।

जैसे ही वह सीढ़ियों से उतरी, उसे महसूस हुआ कि कोई पीछे-पीछे चल रहा है। उसने पलटकर देखा—कोई नहीं। लेकिन सीढ़ियों के नीचे से हल्की फुसफुसाहट सुनाई दी।

“नेहा… नेहा…”

उसका दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। डरते-डरते उसने टॉर्च नीचे की ओर घुमाई। वहाँ बस पुराना ट्रंक रखा था। उसने सोचा शायद उसका वहम है। लेकिन जैसे ही वह पास पहुँची, ट्रंक अपने-आप चर्र-चर्र की आवाज़ से खुल गया।

अंदर एक पुरानी खून से सनी गुड़िया रखी थी। उसकी आँखें नेहा की आँखों में घूर रही थीं। अचानक गुड़िया के मुँह से वही आवाज़ आई—
“नेहा… मुझे आज़ाद करो…”

नेहा चीखते हुए पीछे हटी, लेकिन तभी किसी ठंडी उँगलियों ने उसके टखने को पकड़ लिया। उसने टॉर्च नीचे फेंकी और अंधेरे में उसकी चीख पूरे मकान में गूँज उठी।

अगले दिन पड़ोसियों ने दरवाज़ा तोड़ा… और सीढ़ियों के नीचे खून के धब्बे मिले। ट्रंक खाली था।

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