Horror Story

वापसी — लक्ष्मी जायसवाल

आरव, दिल्ली का एक महत्वाकांक्षी लेखक था, जो अपनी अगली किताब के लिए एकांत और सच्ची घटनाओं से प्रेरणा चाहता था। इसलिए उसने उत्तराखंड के एक छोटे गाँव ‘कालीघाट’ में एक पुराना, वीरान बंगला किराए पर लिया — जिसे गाँव वाले “शापित हवेली” कहते थे।

गाँव वालों ने चेताया था —

“साहब, सूरज डूबने के बाद उस हवेली में कोई नहीं जाता। वहाँ ‘वो’ रहती है…”

आरव हँस पड़ा, “डरावनी कहानियाँ तो मेरी खुराक हैं!”


पहली रात

हवेली में घुसते ही एक अजीब-सी ठंडक उसके शरीर में समा गई। दीवारों पर पुरानी, धुंधली तस्वीरें थीं और लकड़ी की सीढ़ियाँ हर कदम पर कराहती थीं।

रात के 2 बजे…

आरव की नींद खुली। कमरे में तेज़ सर्दी थी, जैसे किसी ने बर्फानी हवा फूँकी हो। तभी दरवाज़ा खुद-ब-खुद चरचराकर खुल गया।

एक लड़की खड़ी थी — सफेद साड़ी में, उलझे बाल, बिना आँखों के गड्ढे, और होंठों पर एक रहस्यमयी मुस्कान।

आरव डर गया… चीखना चाहा, लेकिन आवाज़ गले में ही फँस गई।

लड़की बोली —
“तुम वापस क्यों आए आरव…?”

आरव ने कभी उसे देखा नहीं था, फिर भी चेहरा जाना-पहचाना लग रहा था।

दूसरे दिन

गाँव में पूछताछ पर पता चला, दस साल पहले इसी हवेली में एक लड़की “माया” ने आत्महत्या की थी। कहा जाता है वो एक लेखक से प्रेम करती थी… जिसने उसे धोखा दिया और हवेली छोड़ भाग गया।

आरव को अब याद आने लगा — कॉलेज के दिनों में माया… वही मासूम लड़की, जो उसकी कहानियों की दीवानी थी।
और वही लड़की जिसने उस दिन कहा था —
“अगर तुम मुझे छोड़ोगे, तो मैं मर जाऊँगी… पर मरकर भी तुम्हें नहीं छोड़ूँगी।”


तीसरी रात

आरव भाग जाना चाहता था, लेकिन हवेली का दरवाज़ा ही नहीं खुला।

रात को कमरे में फिर वही ठंडक… और वही लड़की।

इस बार उसने कहा —

“अब मेरी अधूरी कहानी तुम पूरी करोगे, अपने खून से…”


अगली सुबह गाँव वालों ने हवेली में आरव की लाश पाई — उसकी उंगलियाँ टूटी हुई थीं, जैसे किसी ने जबरन उससे कुछ लिखवाया हो।

टेबल पर एक पन्ना रखा था:

“माया की वापसी — एक अधूरी प्रेम कहानी, अब पूरी हुई।”

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