नरक की खिड़की

नरक की खिड़की

—लक्ष्मी जायसवाल

सन् 2014, मुंबई के मलाड इलाके में एक पुरानी इमारत थी — राजवाड़ी अपार्टमेंट। इस इमारत में 601 नंबर का एक फ्लैट कई वर्षों से बंद पड़ा था। लोगों का मानना था कि उस फ्लैट में कुछ अजीब होता है, लेकिन किसी ने कभी खुलकर कुछ कहा नहीं।

फिर एक नई शादीशुदा जोड़ी, राघव और नेहा, वह फ्लैट किराए पर लेकर रहने आ गई। शुरू में सब सामान्य था। लेकिन चौथे दिन से चीज़ें बदलने लगीं।

रात को नेहा को खिड़की से किसी के रोने की आवाज़ें आतीं।

राघव ने सोचा यह कोई बिल्ली या बाहर का शोर है, लेकिन आवाज़ें और बढ़ती गईं — रोने से लेकर चीखने तक।

एक रात नेहा ने देखा कि खिड़की के बाहर एक औरत उलटी लटकी हुई है, जो सीधी नेहा की ओर देख रही थी — आँखें लाल और चेहरा बिना पलक झपकाए।


नेहा बेहोश हो गई।

अगली सुबह पुलिस को बुलाया गया, और जब उन्होंने खिड़की के बाहर की दीवार देखी — तो वहाँ एक पुरानी खून से लिखी लाइन दिखी:

“मैं वापस आऊँगी।”



फ्लैट की पुरानी फाइलों में यह पता चला कि 601 नंबर फ्लैट में एक युवती ने आत्महत्या की थी — उसी खिड़की से कूदकर। कहा जाता है कि उसकी शादी जबरन करवाई गई थी और शादी की पहली रात उसने कूदकर जान दे दी।

जो भी उस फ्लैट में आता, उसे पहली रात के बाद ‘उसकी मौजूदगी’ महसूस होती।

राघव और नेहा ने सिर्फ 6 दिन में फ्लैट छोड़ दिया और आज तक वह फ्लैट फिर से किराए पर नहीं चढ़ा।

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