तेरी शैडो भी मुझ पर न पड़े
रात ने जब साँसें रोक लीं,दीवारों ने फुसफुसाना शुरू किया,तू बोली थी — “तेरी शैडो भी मुझ पर न पड़े…”पर आज तेरी ही परछाई मेरे कमरे में जली दीया।आईने में तेरा चेहरा नहीं,पर तेरी आँखों की सर्द लकीरें हैं,मैं बंद दरवाज़े के उस पार भीतेरी पदचाप सुनती हूँ, गहरी, अधूरी तेरी ज़ंजीरें हैं।खिड़की की झिरी से झाँकतीतेरी हँसी अब भी काँपती है,जो कभी प्यार में थी मीठी,अब मौत की ठंडी छाँव में थरथराती है।मेरे तकिए पर तेरा नाम खुद-ब-खुद लिख जाता है,रात बारह बजते ही स्याही खुद चल पड़ती है,मैं जागती हूँ तो देखती हूँ—तेरी शैडो अब मेरे जिस्म पर चढ़ती है।तू चाहती थी दूर रहूँ तुझसे,मैंने दूरी निभाई भी सही,पर तेरे शाप ने ये तय कर दिया—अब तू मुझसे नहीं, मैं तुझसे नहीं बची।तेरी शैडो भी मुझ पर न पड़ेरात ने जब साँसें रोक लीं,दीवारों ने फुसफुसाना शुरू किया,तू बोली थी — “तेरी शैडो भी मुझ पर न पड़े…”पर आज तेरी ही परछाई मेरे कमरे में जली दीया।आईने में तेरा चेहरा नहीं,पर तेरी आँखों की सर्द लकीरें हैं,मैं बंद दरवाज़े के उस पार भीतेरी पदचाप सुनती हूँ, गहरी, अधूरी तेरी ज़ंजीरें हैं।खिड़की की झिरी से झाँकतीतेरी हँसी अब भी काँपती है,जो कभी प्यार में थी मीठी,अब मौत की ठंडी छाँव में थरथराती है।मेरे तकिए पर तेरा नाम खुद-ब-खुद लिख जाता है,रात बारह बजते ही स्याही खुद चल पड़ती है,मैं जागती हूँ तो देखती हूँ—तेरी शैडो अब मेरे जिस्म पर चढ़ती है।तू चाहती थी दूर रहूँ तुझसे,मैंने दूरी निभाई भी सही,पर तेरे शाप ने ये तय कर दिया—अब तू मुझसे नहीं, मैं तुझसे नहीं बची।तेरी शैडो भी मुझ पर न पड़ेरात ने जब साँसें रोक लीं,दीवारों ने फुसफुसाना शुरू किया,तू बोली थी — “तेरी शैडो भी मुझ पर न पड़े…”पर आज तेरी ही परछाई मेरे कमरे में जली दीया।आईने में तेरा चेहरा नहीं,पर तेरी आँखों की सर्द लकीरें हैं,मैं बंद दरवाज़े के उस पार भीतेरी पदचाप सुनती हूँ, गहरी, अधूरी तेरी ज़ंजीरें हैं।खिड़की की झिरी से झाँकतीतेरी हँसी अब भी काँपती है,जो कभी प्यार में थी मीठी,अब मौत की ठंडी छाँव में थरथराती है।मेरे तकिए पर तेरा नाम खुद-ब-खुद लिख जाता है,रात बारह बजते ही स्याही खुद चल पड़ती है,मैं जागती हूँ तो देखती हूँ—तेरी शैडो अब मेरे जिस्म पर चढ़ती है।तू चाहती थी दूर रहूँ तुझसे,मैंने दूरी निभाई भी सही,पर तेरे शाप ने ये तय कर दिया—अब तू मुझसे नहीं, मैं तुझसे नहीं बची।

