तीसरी मंजिल का पहरेदार (The Guardian of the 3rd Floor)
रोहित को पैसों की सख्त जरूरत थी, इसलिए उसने शहर के किनारे बनी एक नई ऊँची बिल्डिंग में ‘नाइट शिफ्ट’ सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी कर ली। वह बिल्डिंग अभी पूरी तरह बनी नहीं थी और रात को वहां सन्नाटा इतना गहरा होता था कि खुद की सांसें भी शोर करती थीं। सुपरवाइजर ने उसे जॉइनिंग के वक्त सिर्फ एक अजीब सलाह दी— “12 बजे के बाद लिफ्ट का इस्तेमाल मत करना, और अगर तीसरी मंजिल का अलार्म बजे, तो उसे अनसुना कर देना।” पहली दो रातें शांति से गुजरीं। लेकिन तीसरी रात, ठीक रात के 12:05 बजे, कंट्रोल रूम में ‘तीसरी मंजिल’ का अलार्म बजने लगा। रोहित ने सोचा शायद कोई चोर होगा। उसने सुपरवाइजर की बात अनसुनी की और टॉर्च लेकर लिफ्ट की तरफ बढ़ा। उसे याद आया कि लिफ्ट मना थी, इसलिए वह सीढ़ियों से जाने लगा। जैसे ही वह तीसरी मंजिल पर पहुँचा, उसकी टॉर्च की रोशनी एक लंबे गलियारे (corridor) पर पड़ी। वहां दूर कोई खड़ा था। एक साया… जो दीवार की तरफ मुँह करके खड़ा था। रोहित ने चिल्लाकर पूछा, “कौन है वहां?” वह साया हिला नहीं। रोहित धीरे-धीरे उसके पास गया। जैसे-जैसे वह करीब पहुँच रहा था, उसे एक अजीब सी बदबू आने लगी—**सड़ा हुआ मांस**। जब वह सिर्फ 2 फीट की दूरी पर था, उसने साए के कंधे पर हाथ रखा। वह साया धीरे से मुड़ा। रोहित की चीख गले में ही फंस गई। उस साए का चेहरा नहीं था! वहां सिर्फ काली, खाली खाल थी, और जहाँ आँखें होनी चाहिए थीं, वहां से **काला धुआं** निकल रहा था। रोहित पीछे भागा और सीधा कंट्रोल रूम में घुसकर दरवाजा लॉक कर लिया। उसने कांपते हाथों से CCTV मॉनिटर चेक किया। स्क्रीन पर वह गलियारा दिख रहा था। लेकिन वहां कोई नहीं था। रोहित को लगा उसने कोई वहम देखा है। तभी उसकी नज़र दूसरे मॉनिटर पर पड़ी, जो कंट्रोल रूम के ठीक बाहर का था। वहां वही बिना चेहरे वाला साया खड़ा था, और वह सीधा कैमरे की तरफ देख रहा था… जैसे उसे पता हो कि रोहित अंदर है। तभी, कंट्रोल रूम के अंदर रखे पुराने रेडियो से एक घरघराहट भरी आवाज़ आई— “रोहित… तुमने अलार्म बंद नहीं किया…” रोहित ने ऊपर छत की तरफ देखा। वहां से खून की बूंदें टपक रही थीं। जब उसने पूरी तरह ऊपर देखा, तो वह साया छत से चिपका हुआ था और अपना बिना चेहरे वाला सिर नीचे झुकाकर मुस्कुरा रहा था (बिना होंठों के)। अगले दिन, बिल्डिंग के मालिक को सिर्फ रोहित की टॉर्च और उसकी वर्दी मिली। रोहित का कहीं अता-पता नहीं था। लेकिन उस रात के बाद से, जब भी तीसरी मंजिल का अलार्म बजता है, CCTV में दो साए दिखाई देते हैं… एक बिना चेहरे वाला, और दूसरा… जो हूबहू रोहित की तरह है।
